दिल को समझा लिया है मैंने हँसने को,
फिर भी न जाने क्यूँ आँखों में पानी है !
भूल जाने की हद तक गया हूँ मैं इस बार,
फिर भी न जाने क्यूँ यादों में खोया हूँ !
वो मुझे नहीं मिलेंगे यकीन सा हो गया है,
फिर भी न जाने क्यूँ इंतज़ार कर रहा हूँ !
अब रोता नहीं हूँ मैं रातों को याद करके,
फिर भी न जाने क्यूँ हर रात जगा हूँ !
जा तो चुके हैं वो जिनसे से था वजूद मेरा,
फिर भी न जाने क्यूँ अब तक सलामत हूँ !
हर पल याद करता हूँ, बेहद चाहता हूँ जिसे,
फिर भी न जाने क्यूँ उसी से कहता नहीं हूँ !
फिर भी न जाने क्यूँ आँखों में पानी है !
भूल जाने की हद तक गया हूँ मैं इस बार,
फिर भी न जाने क्यूँ यादों में खोया हूँ !
वो मुझे नहीं मिलेंगे यकीन सा हो गया है,
फिर भी न जाने क्यूँ इंतज़ार कर रहा हूँ !
अब रोता नहीं हूँ मैं रातों को याद करके,
फिर भी न जाने क्यूँ हर रात जगा हूँ !
जा तो चुके हैं वो जिनसे से था वजूद मेरा,
फिर भी न जाने क्यूँ अब तक सलामत हूँ !
हर पल याद करता हूँ, बेहद चाहता हूँ जिसे,
फिर भी न जाने क्यूँ उसी से कहता नहीं हूँ !
Sundar Prastuti
ReplyDeleteNeeraj Ji, Dil se shukriya... :)
ReplyDeleteaaPke sarahneeya aur Protsahit comment ka !